परिवार की सुख-शांति के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, महिलाओं से लेकर दिव्यांग तक उठा रहे कांवड़

 शामली कावड़ यात्रा में महिलाओं की भागीदारी, परिवार के साथ कांवड़ यात्रा और कबूतर वाली अनोखी कांवड़—


परिवार की सुख-शांति के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब, महिलाओं से लेकर दिव्यांग तक उठा रहे कांवड़


पति-पत्नी, मां-बेटा और दादी-पोता साथ लेकर आ रहे गंगाजल; 12 और 15 फीट ऊंची कांवड़ बनी आकर्षण, 15 लाख की कबूतर कांवड़ भी चर्चा में


शामली। कांवड़ यात्रा में इस बार आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। हरिद्वार से गंगाजल लेकर शामली से गुजर रहे शिवभक्तों में महिलाओं की संख्या भी बड़ी दिखाई दे रही है। पति-पत्नी, मां-बेटा और दादी-पोता तक एक साथ कांवड़ यात्रा में शामिल होकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। कोई नंगे पैर गंगाजल लेकर आगे बढ़ रहा है तो कोई ऊंची और आकर्षक कांवड़ के साथ शिवधाम की ओर रवाना है।


सोनीपत निवासी सोनिया, राजबाला, ऋतिका, स्नेहा और हर्षित अपने परिवार के साथ कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार के सभी सदस्य हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए हैं। उनकी इच्छा है कि भगवान भोलेनाथ की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहे। महिलाओं ने बताया कि कांवड़ यात्रा को लेकर उनमें भी उतना ही उत्साह है, जितना पुरुष शिवभक्तों में है।


मां-बेटे से लेकर दादी-पोते तक साथ


शामली से गुजर रहे कांवड़ मार्ग पर परिवार के साथ यात्रा करने वाले कई समूह दिखाई दे रहे हैं। कहीं पति-पत्नी एक साथ गंगाजल लेकर आगे बढ़ रहे हैं तो कहीं मां अपने बेटे के साथ कांवड़ यात्रा कर रही है। हिसार निवासी सत्या भी अपने पोते के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकली हैं। उन्होंने बताया कि परिवार की सुख-शांति और खुशहाली के लिए वह पोते के साथ यह यात्रा कर रही हैं।


दिव्यांग सतीश भी आस्था के सफर पर


हिसार निवासी सतीश दिव्यांग होने के बावजूद कांवड़ यात्रा में शामिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि वह परिवार की सुख-शांति की कामना लेकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले हैं। उनका कहना है कि आस्था और भगवान शिव में विश्वास ने उन्हें इस यात्रा के लिए प्रेरित किया।


12 और 15 फीट ऊंची कांवड़ ने खींचा ध्यान


कांवड़ यात्रा में इस बार विशाल कांवड़ भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। सोनीपत निवासी सुशील सैनी 12 फीट ऊंची कांवड़ लेकर शामली पहुंचे। वहीं सोनीपत के ही अंकित ने अपने साथियों के साथ करीब 15 फीट ऊंची कांवड़ तैयार की है। ऊंचाई और सजावट के कारण इन कांवड़ों को देखने के लिए लोग रास्ते में रुक रहे हैं।


केदारनाथ में शहीद हुए कबूतरों की याद में 15 लाख की कांवड़


इसी बीच सोनीपत के गांव निवासी अंकित की कबूतर वाली अनोखी कांवड़ भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अंकित 10 कबूतरों को साथ लेकर कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि केदारनाथ में कबूतरों का एक जोड़ा शहीद हो गया था। उनकी याद में उन्होंने कबूतर कांवड़ लेकर चलने का संकल्प लिया।


अंकित ने बताया कि वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर पानीपत होते हुए शामली पहुंचे हैं। कांवड़ में 10 कबूतरों को शामिल किया गया है और उनके लिए यात्रा के दौरान विशेष व्यवस्था की गई है। अंकित के अनुसार, इस पूरी कांवड़ को तैयार कराने और यात्रा में करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए हैं।


कबूतरों वाली कांवड़ को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुट रही है। शामली पहुंचने पर भी यह कांवड़ लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही। श्रद्धालु कांवड़ के साथ चल रहे कबूतरों को देखकर उत्सुकता से अंकित से इसके बारे में जानकारी लेते नजर आए।


कांवड़ यात्रा में इस बार परिवार की एकजुटता, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, दिव्यांग शिवभक्तों की आस्था और अनोखी कांवड़ों ने यात्रा को अलग रंग दे दिया है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर शिवभक्त लगातार शामली के रास्ते अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post

Ad 1

Ad 2