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दुबई के शारजाह से 25 दिन बाद रार्धना पहुंचा युवक का शव, नम आंखों से दी अंतिम विदाई

 

सरधना।


थाना क्षेत्र के रार्धना गांव निवासी 26 वर्षीय युवक का शव बुधवार को दुबई के शारजाह से करीब 25 दिन बाद गांव पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और क्षेत्रीय लोग एकत्र हो गए। गमगीन माहौल में युवक को अंतिम विदाई दी गई और गांव के श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।


जानकारी के अनुसार रार्धना निवासी विवेक सोम करीब सात माह पहले रोजगार की तलाश में दुबई गया था। इलेक्ट्रॉनिक्स का काम सीखने के बाद उसे दुबई स्थित अल्फ्राई कंपनी में नौकरी मिली थी। नौकरी मिलने के बाद कंपनी ने उसे शारजाह में कार्य के लिए भेज दिया था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी मिलने से घर की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और परिवार के सपने पूरे हो सकेंगे। लेकिन करीब 25 दिन पहले विवेक की शारजाह में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।


विदेश में हुई मौत के बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया आसान नहीं थी। परिवार और ग्रामीण लगातार प्रशासनिक अधिकारियों तथा संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर शव को जल्द भारत लाने की मांग कर रहे थे। करीब 25 दिनों तक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बुधवार को विवेक का शव उसके पैतृक गांव रार्धना पहुंच सका।


शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां शशि अपने बेटे के शव को देखकर बेसुध हो गईं। बहन शालू और छोटे भाई सन्नी सहित अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों ने परिजनों को ढांढस बंधाने का प्रयास किया, लेकिन माहौल इतना भावुक था कि हर किसी की आंखें नम हो गईं। अंतिम दर्शन के लिए गांव के लोगों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और गणमान्य लोगों ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।


ग्रामीणों ने बताया कि विवेक के पिता प्रवीण सोम का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी काफी हद तक विवेक के कंधों पर आ गई थी। वह परिवार का सबसे बड़ा बेटा था और विदेश जाकर मेहनत कर अपने परिवार को बेहतर जीवन देना चाहता था। ग्रामीणों के अनुसार विवेक हर माह अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा घर भेजता था। उन्हीं पैसों से घर का खर्च चलता था और बहन की शादी के लिए भी वह रकम जोड़ रहा था।


ग्रामीणों ने बताया कि विवेक बेहद मिलनसार और मेहनती स्वभाव का युवक था। उसकी असमय मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है। लोगों का कहना है कि परिवार ने अपना सहारा खो दिया है। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और नम आंखों से उसे विदाई दी। इसके बाद गांव के श्मशान घाट पर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। विवेक की मौत से परिवार के सामने जहां भावनात्मक संकट खड़ा हो गया है, वहीं आर्थिक रूप से भी परिवार पर कठिन परिस्थितियां आ गई हैं। पूरे गांव में इस घटना को लेकर गहरा दुख व्याप्त है।

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