**सरधना।** कस्बे के ईदगाह रोड स्थित कब्रिस्तान के बीच से नाला निकालने की मांग को लेकर बुधवार को दो पक्षों के बीच विवाद गहरा गया। एक ओर कुछ स्थानीय लोग जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए कब्रिस्तान की भूमि से होकर नाला निर्माण कराने की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर मुस्लिम समाज के लोगों ने इसका कड़ा विरोध जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताया है। विवाद बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और एसडीएम के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश की।
जानकारी के अनुसार ईदगाह रोड स्थित कब्रिस्तान के सामने कई मकान, डेरी तथा अन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। इन क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा पानी लंबे समय से मुख्य मार्ग की ओर बहता है, जिससे बरसात के दिनों में जलभराव और गंदगी की समस्या और अधिक बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कब्रिस्तान के बीच से होकर एक नाला तालाब तक निकाल दिया जाए तो जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।
इसी मांग को लेकर बुधवार को एक पक्ष के लोगों ने तहसील पहुंचकर एसडीएम को प्रार्थना पत्र सौंपा। उन्होंने प्रशासन से जल्द नाला निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि वर्षों से क्षेत्रवासी जलभराव और गंदगी की समस्या से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने से आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
दूसरी ओर मुस्लिम समाज के लोगों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए तहसील पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जिस स्थान से नाला निकालने की बात की जा रही है, वहां पहले कभी कोई नाली या नाला नहीं रहा है। उनका आरोप है कि कब्रिस्तान की भूमि को नुकसान पहुंचाकर नाला निर्माण करना धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसा होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि कब्रिस्तान की भूमि को सुरक्षित रखा जाए और जल निकासी के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता तलाशा जाए।
मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि कब्रिस्तान एक धार्मिक और संवेदनशील स्थल है, जहां वर्षों से लोगों के परिजनों की कब्रें मौजूद हैं। ऐसे में वहां किसी प्रकार का निर्माण कार्य कराना उचित नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर नाला निर्माण कराया गया तो समाज में असंतोष बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे क्षेत्र की जल निकासी समस्या के समाधान के पक्षधर हैं, लेकिन इसके लिए किसी अन्य मार्ग का चयन किया जाना चाहिए।
दोनों पक्षों की शिकायतें मिलने के बाद उप जिलाधिकारी उदित नारायण सेंगर ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए। उनके आदेश पर तहसील की राजस्व टीम मौके पर पहुंची और भूमि की पैमाइश कर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण कर संभावित जल निकासी मार्गों की भी जानकारी जुटाई। पैमाइश के दौरान दोनों पक्षों के लोग भी मौके पर मौजूद रहे और अपने-अपने पक्ष प्रशासन के सामने रखे।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पैमाइश रिपोर्ट और राजस्व अभिलेखों का अध्ययन करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। फिलहाल किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया है। अधिकारियों का उद्देश्य दोनों पक्षों की भावनाओं और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकालना है, जिससे किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों और क्षेत्र की जल निकासी समस्या का भी निस्तारण हो सके।
उप जिलाधिकारी उदित नारायण सेंगर ने बताया कि दोनों पक्षों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर राजस्व टीम को मौके पर भेजकर पैमाइश कराई गई है। टीम की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोनों पक्षों को बुलाकर वार्ता की जाएगी। प्रशासन का प्रयास है कि आपसी सहमति और कानून के दायरे में रहते हुए विवाद का समाधान निकाला जाए। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की।
फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और दोनों पक्ष अपने-अपने पक्ष पर अड़े हुए हैं। प्रशासन की अगली कार्रवाई और दोनों पक्षों के बीच होने वाली वार्ता पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि बातचीत और सहमति के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया जाएगा, जिससे क्षेत्र में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो।
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