फर्जी टैग लगी बेडशीट का गोरखधंधा: डीएम के पत्र का इंतजार, जीएसटी जांच से हड़कंप तय

AkashMalik
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सरधना: कस्बे में नामी कंपनियों के फर्जी टैग लगाकर बेडशीट तैयार कर बाजार में खपाने के संगठित गोरखधंधे पर अब शिकंजा कसने की तैयारी है। जीएसटी विभाग इस बहुचर्चित प्रकरण में जिलाधिकारी के आधिकारिक पत्र का इंतजार कर रहा है। उधर, सरधना व्यापार मंडल ने पूरे मामले को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।

बीते शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान व्यापार मंडल अध्यक्ष पंकज जैन के नेतृत्व में व्यापारियों का प्रतिनिधिमंडल डीएम डॉ. वीके सिंह से मिला था। व्यापारियों ने साफ शब्दों में बताया कि कस्बे में करीब 90 प्रतिशत बेडशीट निर्माण कार्य नियमों के तहत, अपने-अपने ब्रांड नाम से किया जाता है, लेकिन कुछ लालची तत्व नामी कंपनियों के फर्जी टैग लगाकर नकली बेडशीट तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल ईमानदार व्यापारियों की साख पर बट्टा लग रहा है, बल्कि सरकार को भी करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।

व्यापारियों ने आरोप लगाया कि फर्जी टैग, नकली बिलिंग और अवैध सप्लाई चेन के सहारे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही है। इस गंभीर शिकायत पर डीएम ने जीएसटी विभाग से टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग और सप्लाई चेन की गहन जांच कराने का आश्वासन दिया था।

मंगलवार को व्यापार मंडल अध्यक्ष पंकज जैन ने बताया कि बुधवार को जीएसटी विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। वहीं जीएसटी विभाग के एडिशनल कमिश्नर सुशील कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि अभी तक जिलाधिकारी का आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलते ही पूरे प्रकरण की सिलसिलेवार जांच शुरू कर दी जाएगी।

जांच शुरू हुई तो होंगे बड़े खुलासे

कस्बे में नामी कंपनियों के नाम पर फर्जी टैग लगाने का खेल लंबे समय से बड़े पैमाने पर चल रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि जीएसटी विभाग ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी, तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे और आरोपितों को जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है।

गौरतलब है कि बीते बुधवार को एसओजी टीम ने डी-डिकोर कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कई गोदामों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान करीब 70 लाख रुपये मूल्य की फर्जी टैग लगी बेडशीट, पैकिंग सामग्री और मशीनें बरामद की गई थीं। डी-डिकोर कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर की तहरीर पर पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

हालांकि छापेमारी के बाद की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि रातभर कथित ‘सेटिंग’ के खेल के बाद अगले दिन तीन गोदाम संचालकों को धारा 41 के नोटिस पर छोड़ दिया गया, जबकि श्रमिकों का धारा 151 के तहत चालान कर औपचारिकता निभा दी गई।

अब सबकी नजरें डीएम के पत्र और जीएसटी जांच पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहेगी या फिर फर्जी टैग के इस संगठित अपराध पर वास्तव में निर्णायक प्रहार करेगी।

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