मेरठ। खेल नगरी के नाम से पहचान रखने वाला मेरठ आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया के खेल उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। शहर और आसपास के गांवों में हजारों परिवार खेल सामग्री निर्माण से जुड़े हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो घरों में बैठकर बैडमिंटन, क्रिकेट और अन्य खेलों के सामान तैयार कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
दैनिक भास्कर की टीम जब मेरठ के शोभापुर गांव पहुंची तो वहां महिलाओं ने बताया कि वे घर पर बैडमिंटन रैकेट और उससे जुड़े सामान तैयार करती हैं। एक महिला ने बताया कि वह प्रतिदिन काम करके करीब 600 रुपये तक कमा लेती हैं, जिससे परिवार का खर्च चलता है। उन्होंने कहा कि कमाई से ज्यादा खुशी तब होती है जब टीवी पर विदेशी खिलाड़ियों को उन्हीं के हाथों से तैयार किए गए सामान का इस्तेमाल करते हुए देखती हैं।
महिलाओं का कहना है कि खेल सामग्री निर्माण ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब अपने हुनर से परिवार की आय में योगदान दे रही हैं।
मेरठ लंबे समय से खेल सामग्री निर्माण का बड़ा केंद्र रहा है। यहां क्रिकेट बैट, फुटबॉल, हॉकी स्टिक, बॉक्सिंग ग्लव्स, बैडमिंटन उपकरण और जिम इक्विपमेंट सहित अनेक खेल उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनका निर्यात कई देशों में होता है। शहर में सैकड़ों खेल सामग्री इकाइयां कार्यरत हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
खेल उद्योग को नई पहचान देने के लिए मेरठ में 700 एकड़ क्षेत्र में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का निर्माण भी किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, स्पोर्ट्स साइंस लैब और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे मेरठ की पहचान वैश्विक खेल हब के रूप में और मजबूत होगी।
मेरठ की इन महिलाओं की मेहनत यह साबित कर रही है कि खेलों में जीत का जश्न केवल मैदान में नहीं, बल्कि उन घरों में भी मनाया जाता है जहां खिलाड़ियों के लिए खेल सामग्री तैयार की जाती है।

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