सिलेंडर के लिए भटकता रहा शिक्षक, मजबूरी में उठाया खौफनाक कदम—एजेंसी पर जमकर हंगामा

 

सिलेंडर के लिए भटकता रहा शिक्षक, मजबूरी में उठाया खौफनाक कदम—एजेंसी पर जमकर हंगामा

सरधना। कालंद चुंगी स्थित भारत गैस एजेंसी की लापरवाही ने एक शिक्षक को इस कदर बेबस कर दिया कि वह अपनी जान जोखिम में डालने तक पहुंच गया। मंगलवार को दशरथपुर निवासी शिक्षक कृष्ण स्वरूप त्यागी सल्फास की गोलियों का पैकेट लेकर एजेंसी पहुंच गए और सिलेंडर न मिलने से आक्रोशित होकर जमकर हंगामा किया। उनकी इस हरकत से एजेंसी परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए।


पीड़ित शिक्षक का आरोप है कि उन्होंने चार अप्रैल को गैस सिलेंडर बुक कराया था। 13 अप्रैल को मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज भी आ गया, लेकिन हकीकत में सिलेंडर उनके घर तक नहीं पहुंचा। जब वह एजेंसी पहुंचे तो कर्मचारियों ने टालमटोल करते हुए “घर भिजवा देंगे” कहकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद से शिक्षक लगातार एजेंसी के चक्कर काटते रहे, लेकिन हर बार उन्हें झूठे आश्वासन ही मिले।


मंगलवार को जब सब्र का बांध टूटा तो कृष्ण स्वरूप त्यागी सीधे एजेंसी पहुंच गए। गुस्से में उन्होंने सल्फास की गोलियों का पैकेट निकाल लिया और विरोध जताने लगे। कर्मचारियों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो माहौल और गरमा गया। वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और एजेंसी में हड़कंप मच गया। किसी तरह कर्मचारियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की और शिक्षक को शांत कराया।


शिक्षक ने एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरी व्यवस्था सरकार की छवि खराब करने का काम कर रही है। उनका कहना है कि कई दिनों से उनके घर में गैस नहीं है और मजबूरी में अंगीठी पर खाना बन रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी सुमन त्यागी लंबे समय से बीमार हैं, जिसके कारण यह परेशानी और भी भारी पड़ रही है।


गौरतलब है कि शिक्षक एजेंसी पहुंचने से पहले मीडिया के पास भी गए थे और अपनी पीड़ा साझा करते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। उनका कहना था कि अगर समय पर सिलेंडर मिल जाता तो उन्हें यह कदम उठाने की नौबत नहीं आती।


हंगामा बढ़ता देख आखिरकार एजेंसी प्रबंधन हरकत में आया। एजेंसी मालिक अनस ने तुरंत कर्मचारियों को निर्देश दिए और शिक्षक के घर सिलेंडर भिजवाया गया। हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या हर उपभोक्ता को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए ऐसा ही दबाव बनाना पड़ेगा?


यह घटना एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि समय रहते जिम्मेदारी निभाई जाती, तो न केवल एक शिक्षक की गरिमा बचती, बल्कि इस तरह की खतरनाक स्थिति भी पैदा नहीं होती।

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